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भारतीय सविंधान - मूल कर्तव्य

Posted on : June 9th 2019, 11:41 am

भारतीय सविंधान -मूल कर्तव्य

मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51 क) मूलतः संविधान का अंगीकृत भाग नही हैं। 1976 ई. में मूल कर्तव्य के विशय पर सरदार स्वर्ण सिंह समिति का गठन किया गया। समिति ने सिफारिश की कि संविधान में मूल कर्तव्य का अलग अध्याय होना चाहिए। इसमें बताया गया कि नागरिकों को अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी निभाना आना चाहिए। सरकार ने समिति की सिफारिशो को स्वीकार करते हुए 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 को लागू किया। इसके माध्यम से संविधान में एक नया भाग 4(a )को जोड़ा गया। इस नये भाग में केवल एक अनुच्छेद 51। था, जिसमें 10 मौलिक कर्तव्यों का वर्णन किया गया। भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य को पूर्व रूसी संविधान से प्रभावित होकर लिया गया। वर्तमान में 11 मौलिक कर्व्य हैं।

मूल कर्तव्यों की सूची

भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह -

  • संविधान का पालन करें और उसके आदर्षों, संस्थाओं, राश्ट्रगान का आदर करे।
  • स्वतंत्रता के लिए हमारे राश्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करें।
  • भारत की प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्णु रखे।
  • देश की रक्षा करें और आहृान किये जाने पर राश्ट्र की सेवा करे।
  • भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म भाशा और प्रदेष या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों की भावनाओं के विरूद्ध हो।
  • हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवषाली परम्परा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
  • प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अन्तर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव है रक्षा करे और उसका संवर्द्धन करें तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखे।
  • सभी वैज्ञानिक दृश्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
  • सार्वजनिक सम्पति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।
  • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्श की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राश्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले।
  • जो माता-पिता या संरक्षक हो वह छः से चैदह वर्श के बीच की आयु के यथास्थिति, अपने बच्चे अथवा प्रतिपाल्य को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करें। यह कर्तव्य 86वें संविधान अधिनियम 2002 के तहत जोड़ा गया।

मूल कर्तव्य की विषेशताएं

  • कुछ कर्तव्य नैतिक हैं तो कुछ नागरिक है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान एक नैतिक कर्Ÿाव्य हैं। जबकि राष्ट्रीय ध्वज और गान का सम्मान नागरिक कर्तव्य हैं।
  • ये मूल्य भारतीय परम्परा, पौराणिक कथाओं धर्म एवं क्रियाओं से संबन्धित हैं।
  • मूल कर्तव्य केवल नागरिकों के लिए है न कि विदेषियों के लिए।
  • मूल कर्तव्य के उल्लंघन करने के खिलाफ कोई दाण्डिक विधान नहीं हैं। यद्यपि संसद उनके समुचित क्रियांवयन के लिए स्वतंत्र हैं।

मूल कर्तव्य की आलोचना

  • कर्तव्यों की सूची पूर्ण नही क्योंकि इसमें कुछ अन्य कर्तव्य जैसे-मतदान, कर अदायगी, परिवार नियोजन आदि शामिल नहीं।
  • कुछ कर्तव्य अस्पश्ट तथा वहुअर्थी हैं एवं आम लोगों के समझने में कठिन है।
  • न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय न होने के कारण नैतिक उपदेष मात्र साबित हुआ।