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भारत के प्रमुख गवर्नर जनरल और वायसराय For IB ACIO,SSC MTS, Railways

Posted on : June 9th 2019, 11:47 am

भारत के गवर्नर जनरल : -

लार्ड विलियम बैंटिक : - (1828 - 1835)

  1. 1833 के चार्टर एक्ट के द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा।
  2. लार्ड विलियम बैंटिक भारत का प्रथम गवर्नर जनरल था।
  3. 1829 में इसने सती प्रथा को समाप्त किया।

चाल्र्स मैटकॉफ :- (1835 -1836)

  1. इसे भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है।

लार्ड डलहौजी : ( 1848 - 1856)

  1. इन्होंने ब्रिटिष साम्राज्य के विस्तार के लिए हड़पनीति (क्वबजतपदम व मैटकॉफ ) अपनाई।
  2. इनको भारत में रेलवे का जनक माना जाता है।
  3. नोट : सर्वप्रथम 1853 में बम्बई से थाणे तक प्रथम रेल (कुल 53 किलोमीटर) चली।
  4. इन्होंने भारत में पहली बार डाक टिकटों को चलाया।
  5. भारत में प्रथम टेलीग्राफ लाईन (कलकत्ता से आगरा) इन्हीं के कार्यकाल में 1853 में प्रारम्भ हुई।
  6. इन्होंने शिमला को ग्रीश्म कालीन राजधानी बनाया।

भारत के वायसराय :

  1. 1858 के भारत शाषन  अधिनियम के द्वारा अब भारत के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल व वायसराय कहा गया।

लार्ड केनिंग:- (1856 - 1862)

  1. यह भारत का प्रथम वायसराय था।
  2. नोट : 1857 की क्रान्ति के समय भारत का गवर्नर जनरल लार्ड केनिंग था।
  3. लार्ड केनिंग के इण्डियन हाईकोर्ट एक्ट - 1861 के द्वारा 1862 में बम्बई, कलकŸाा, मद्रास में एक-एक उच्च न्यायालय स्थापित किये।
  4. इसे दयालु वायसराय के रूप में जाना जाता है।

लार्ड मेयो : (1869 - 1872)

  1. इसने ‘कृशि विभाग‘ तथा ‘भारतीय सांख्यिकी सर्वेक्षण विभाग‘ की स्थापना की।
  2. इन्हीं के कार्यकाल में भारत में पहली बार 1872 में जनगणना हुई।
  3. इन्होंने अजमेर में मेयो काॅलेज की स्थापना की।
  4. ये भारत के एक मात्र वायसराय थे जिसकी कार्यकाल के दौरान हत्या हुई।

लार्ड नार्थ बुक:- (1872 - 1876)

  1. इनके समय पंजाब का कुका आन्दोलन हुआ।
  2. नोट : कूका आन्दोलन के संस्थापक - बाबा रामसिंह थे।

लार्ड लिटन : - (1876 - 1880)

  1. इसने 1 जनवरी 1877 को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को केसर-ए-हिन्द की उपाधि से सम्मानित किया एवं दिल्ली दरबार का आयोजन किया।
  2. 1878 में इसने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट लागू किया।
  3. इसने 1878 में भारतीय षस्त्र अधिनियम बना कर लागू किया।

लार्ड रिपन : (1880 - 1884)

  1. इन्होंने 1882 में ‘वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट‘ समाप्त कर दिया।
  2. इन्हें भारत में स्थानीय स्वषासन का जनक माना जाता है इनके समय में 1881 में भारत में नियमित रूप से जनगणना षुरू हुई।
  3. इन्होंने षिक्षा में सुधार हेतु ‘विलियम हंटर कमीषन’ का गठन किया।

लार्ड डफरिन : (1884 - 1888)

  1. इनके कार्यकाल में भारतीय राश्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर, 1885 में बम्बई में हुई।

नोट : कांग्रेस का संस्थापक - ए.ओ. ह्मूम था।

लार्ड कर्जन : (1899 - 1905)

  1. 1902 में विष्वविद्यालय आयोग का गठन किया।
  2. सर्वाधिक रेलवे लाइनों का निर्माण इनके समय में हुआ।
  3. 1904 में भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की।
  4. 16 अक्टूबर 1905 में बंगाल का विभाजन कर्जन ने किया।

लार्ड मिण्टों द्वितीय:- (1905 - 1910)

  1. इनके कार्यकाल में भारत परिशद अधिनियम 1909 पारित हुआ जिसे माले मिण्टों सुधार अधिनियम कहा जाता है।
  2. इनके कार्यकाल में आगाखाँ व सलीम उल्ला खाँ ने 1906 में ढ़ाका में मुस्लिम लीग की स्थापना की।
  3. पहली बार कांग्रेस का विभाजन 1907 में हुआ जिस सूरत की फूट के नाम से जाना जाता है।

लार्ड हार्डिंग द्वितीय:- (1910-1916)

  1. इनके कार्यकाल में 12 दिसम्बर, 1911 को ब्रिटेन के राजा जार्ज पंचम के स्वागत में दिल्ली में भव्य दरबार का आयोजन हुआ। जिसमें निम्न घोशणा हुई -
  2. ( प ) बंगाल विभाजन समाप्त करने की घोशणा की गई। 
    ( पप ) कलकत्ता के स्थान पर दिल्ली भारत की राजधानी घोशित की गई।
    नोट : 1912 में दिल्ली भारत की राजधानी बनी। 
    नोट : जार्ज पंचम एक मात्र ब्रिटिष सम्राट हैं जो भारत आये।
  3. लार्ड हार्डिंग द्वितीय की बग्गी पर 1912ई. में क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ने बम फेंका।

लार्ड चैम्स फोर्ड:- (1916 - 1921)

  1. इनके समय 18 मार्च 1919 में रोलेट एक्ट पास हुआ तथा 13 अप्रैल 1919 को जलियावाला बाग हत्या काण्ड हुआ।
  2. खिलाफत आन्दोलन एवं असहयोग आन्दोलन की षुरूआत इन्हीं के समय हुई।

लार्ड रीडिंग : (1921 - 1926)

  1. असहयोग आन्दोलन 1922 में इन्हीं के षासनकाल में समाप्त हुआ।
  2. प्रिंस आफ वेल्स नवम्बर 1921 में भारत आये।

लार्ड इरविन:- (1926 - 1931)

  1. इनके समय में साइमन कमीषन (1928) भारत आया।
  2. गाँधीजी ने डांडी मार्च (1930) व सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930) प्रारम्भ किया।
  3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) इनके समय सम्पन्न हुआ।
  4. 5 मार्च, 1931 को गाँधी इरविन समझौता हुआ जिसमें गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन वापस ले लिया।

लार्ड विलिंगटन : (1931 - 1936)

  1. इनके कार्यकाल में ‘द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) लंदन में सम्पन्न हुआ। जिसमें कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गाँधी जी ने भाग लिया।
  2. इनके समय में ही 24 सितम्बर 1932 को गाँधीजी एवं अम्बेडकर के बीच पूना समझौता हुआ। इस समझौते की मध्यस्थता मदन मोहन मालवीय ने की थी।
  3. तीसरा गोलमेज सम्मलेन, (1932) इनके कार्यकाल में हुआ।

लार्ड लिनलिथगो : - (1936 - 1944)

  1. इनके समय पहली बार 1940 में पाकिस्तान की मांग की गई। 8 अगस्त, 1940 को अगस्त प्रस्ताव लाया गया।
  2. 1942 में इन्हीं के कार्यकाल में क्रिप्स मिषन भारत आया।
  3. इन्हीं के कार्यकाल में गाँधीजी ने तीसरा जन-आन्दोलन भारत छोड़ो आन्दोलन 8 अगस्त 1942 को प्रारम्भ किया।

लार्ड वेवेल : (1944 - 1947)

  1. 1945 ई. में इनके समय में षिमला सम्मलेलन हुआ। ‘केबिनेट मिषन’ 1946 में इन्हीं के समय भारत आया।
  2. इन्हीं के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेन्ट एटली ने भारत को जून, 1948 से पहले स्वतंत्र करने की घोशणा 20 फरवरी, 1947 को की। जिसे ‘फरवरी घोशणा’ कहा जाता है।

लार्ड माउण्ट बेटेन : (मार्च 1947 - जून 1948)

  1. ये भारत के अन्तिम वायसराय थे।
  2. स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे।
  3. इन्होंने 3 जून, 1947 को योजना प्रस्तुत की जिसे माउण्ट बेटेन योजना या 3 जून प्लान कहा जाता है।
  4. नोट : इस योजना के आधार पर ब्रिटिष संसद ने 18 जुलाई, 1947 को भारत स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया। 
    नोट : इस अधिनियम के तहत अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्र कर दिया गया। इसी के तहत भारत का विभाजन भारत व पाकिस्तान के रूप में किया गया ।

चक्रवती राजगोपालाचारी : (1948 - 1950)

  1. 21 जून, 1948 को सी.आर. गोपालाचारी को भारत का गवर्नर जनरल नियुक्त किया। जो स्वतंत्र भारत के दूसरे गवर्नर जनरल तथा प्रथम व एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल थे।
  2. ये भारत के अन्तिम गवर्नर जनरल थे

 

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